On the occasion of International Women's Day, 2013, Nandinik performed 'Anaam Rishtey' organized by Mahila and Bal Vikas Nigam Organis, Gwalior Division at Bhagwat Sahay Auditorium, Gwalior on 10.03.2013, with Deepu Das, Rajeev Shrivastava, Swastika Chakraborty, Sauvik Acharyya, Niti Srivastava, Sapna Guha, Partha Dutta, Nikhil Yadav,Sarthak Ganguly, Anoop Joshi 'Bunty', Kajal Sarkar, Ashok Bulani and NANDINIK Family.
ANAM RISHTE; Direction Deepu Das; Written By: Chandan Sen; Hindi Drama: Parimal Bhattacharya, Photo Partha Dutta
उरुभंगम
उरुभंगम भारतीय शास्त्रीय नाटकों में उत्कृष्ट कृति रूप में जाना जाता है। भास का उरुभंगम संस्कृत नाटिकाओं में आयामी दृष्टिकोण तथा मनुष्य के गुणों के जीवन्त चित्रण के कारण कौमुदी के सामान खिला दिखता है। भास् लिखित प्रत्येक श्लोक वृतांत के अलावा कृति की श्रेष्ठता को दर्शाता है। प्रत्येक श्लोक में मात्र वर्णन ही नहीं, बल्की चरम की सीमा है जिसे वह कोई पटाकसथाना (ड्रमेटिक आयरनी) की मदद से दक्षता से संचालित करता है। इसी कारण हम भास् की गणना स्वर्णिम काल के सर्वाधिक महत्वपूर्ण नाटककार के रूप में करते हैं।
कथानक महाभारत युद्ध के अंतिम चरण पर आधारित है। नाटक आमुख रूप से भीम एवं दुर्योधन के बीच के युद्ध का प्रभावकारी एवं दुर्योधन के त्रसदीपूर्ण अंत का वर्णन है। इस कथा में कृष्ण भीम को दुर्योधन की जंघा को तोरने का संकेत देते हूए दिखलाई देते है।
लढ़ाई के उपरांत दुर्जय दृष्टिहीन राज धृतराष्ट्र, गांधारी एवं दुर्योधन की समस्त रानियों को लेकर समरभूमि, जिसे सामंतापांचाका के नाम से जानते है, लेकर आते हैं।
मृत्यू पूर्व वक्तव्य में दुर्योधन अपने राज्यकाल पर संतोष, गर्व, दायित्व एवं कर्तव्यों का उल्लेख करते हैं। वे मानते हैं की ये सभी कारक उन्हें स्वर्ग में सर्वाधिक सुन्दर स्थान प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होंगे।
लेखक : महाकवि भास।
मणिपुरी अनुवाद : ए कृष्णमोहन शर्मा।
संगीत, परिकल्पना एवं निर्देशन : रतन थियाम।
प्रस्तुति : कोरस रेपर्टरी थियेटर, मणिपुर।
फोटो : सौभिक आचार्य

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